इस्लामी और अरबी ज्योतिष
वह परंपरा जिसने दूसरी सहस्राब्दी की ज्योतिष विद्या का निर्माण किया। इसने मध्यकाल में ग्रीक, फारसी और भारतीय प्रणालियों को एक साथ जोड़ा, खगोल विज्ञान और वेधशालाओं का विकास किया, और दुनिया को 'अरबी अंश', सौर वर्षफल, और महान संयोग जैसी विधाएँ दीं।
- 762
- अरबी अंश
- 960
- संयोग वर्ष
- 600
- years
प्रणाली के अंग
ग्रीक और भारतीय औज़ारों से लेकर फारसी नवाचारों तक, इस्लामी स्वर्ण युग में विकसित तकनीकें और अवधारणाएँ।
The founding chart of Baghdad
खलीफा अल-मंसूर ने नवाबख्त और माशाल्लाह से अपनी 'राउंड सिटी' की पहली ईंटें रखने का समय चुनने को कहा, और उन्होंने 31 जुलाई 762 की दोपहर चुनी। उनकी कुंडली ने पहले भाव में अपने शासक बृहस्पति (Jupiter) के साथ धनु (Sagittarius) को रखा ताकि राजवंश लंबे समय तक चले, और युद्ध के ग्रह मंगल (Mars) को छठे भाव में रखा, जो इसके आनंद (joy) का भाव है।
The House of Wisdom
अब्बासिद खलीफाओं, और विशेष रूप से अल-मामून (शासनकाल 813-833) के अधीन, बगदाद ने प्राचीन विज्ञानों के अरबी अनुवाद का खर्च उठाया। टॉलेमी की 'टेट्राबिब्लोस' (Tetrabiblos) 'किताब अल-अरबा' (Kitab al-Arba'a) या 'चार की पुस्तक' बन गई, और सिडोन के डोरोथियस, वेटियस वैलेंस और फारसी खगोलीय तालिकाएँ जिन्हें 'ज़ीज' (zij) कहा जाता था, भी इसके साथ अरबी में आईं।
The Sabians of Harran
हुर्रान के प्राचीन शहर का एक समुदाय जिसने इस्लामी काल तक तारों की पूजा और हर्मेटिक विद्या (Hermetic lore) को जीवित रखा। इसके विद्वान ग्रीक, सीरियाई और अरबी पढ़ते थे, और उनमें से सबसे महान थाबित इब्न कुरा ने उन ग्रीक गणितीय और खगोलीय कार्यों का अनुवाद किया और उन्हें सुधारा जिन पर ज्योतिषीय गणना निर्भर करती थी।
Al-Kindi's theory of rays
अल-किंदी के 'ऑन द रेज़ ऑफ द स्टार्स' (On the Rays of the Stars), जिसे आज मुख्य रूप से लैटिन में 'डी रेडिइस' (De radiis) के रूप में जाना जाता है, ने तर्क दिया कि दुनिया की हर चीज़ हर दिशा में किरणें भेजती है और तारे सबसे मज़बूत किरणें भेजते हैं। आकाशीय किरणें चंद्रमा के नीचे के चार तत्त्वों को गर्म करती हैं, चलाती हैं और मिलाती हैं। ज्योतिष भौतिकी की एक शाखा बन गया: दूर से कार्य करने वाला एक बल, न कि ईश्वरीय इरादों को पढ़ना।
अबू माशर का बृहत् परिचय
'किताब अल-मुदखल अल-कबीर' (Kitab al-mudkhal al-kabir) ने अरस्तु के 'फिजिक्स' (Physics) और 'ऑन जनरेशन एंड करप्शन' (On Generation and Corruption) के आधार पर ज्योतिष का बचाव किया। ईश्वर पहला कारण है; गतिशील स्वर्ग द्वितीयक कारण हैं जो तत्त्वों को हिलाते हैं और मौसम, शरीर और घटनाओं को आकार देते हैं। 1133 और फिर 1140 में लैटिन में अनूदित होकर, यह अरस्तु के प्राकृतिक दर्शन तक वापस जाने वाले यूरोप के पहले रास्तों में से एक थी।
महान संयोग (Great Conjunctions)
अबू माशर की 'संयोगों की पुस्तक' बृहस्पति और शनि के मिलन में इतिहास को पढ़ती है। ये मिलन लगभग हर 20 साल में होते हैं, लगभग 240 सालों तक एक ही तत्त्व में रहते हैं, और लगभग 960 सालों में वापस लौटते हैं।
विश्व-वर्ष और जलप्रलय
अपनी 'हज़ारों की पुस्तक' में, अबू माशर ने दुनिया के समय के विशाल भारतीय और फारसी चक्रों को लिया और उन्हें कुरान और बाइबिल के इतिहास के अनुरूप बनाया। उन्होंने 3102 ईसा पूर्व में सभी ग्रहों के एक मिलन को जलप्रलय की तारीख माना।
अल-कबीसी के भाव
अल-कबीसी के 'परिचय' (मध्ययुगीन यूरोपीय विश्वविद्यालयों की मानक ज्योतिष पाठ्यपुस्तक) ने एक चतुर्थांश विधि फैलाई: लग्न अंश को क्षितिज से मध्य आकाश तक चढ़ने में लगने वाले समय को तीन बराबर भागों में बाँटें, और भावों के सिरे निकालें।
एस्ट्रोलैब
प्लानिसफेरिक एस्ट्रोलैब स्टीरियोग्राफिक प्रक्षेपण द्वारा आकाश को पीतल की प्लेट पर चपटा करता है। नमाज़ का समय बताने के अलावा, इसने ज्योतिष को भी तेज़ किया: इस पर भावों की रेखाएँ उकेरी जाती थीं, जिससे ज्योतिषी समय के हिसाब से भाव देख सकता था।
लॉट या अरबी अंश
लॉट कुंडली में दो बिंदुओं के बीच की दूरी लेकर उसे लग्न से नापता है। अरबी ज्योतिषियों ने लगभग हर सवाल के लिए दर्जनों लॉट बनाए, जिन्हें अल-बरूनी की पुस्तक में विस्तार से दिया गया है। लैटिन यूरोप इन्हें अरबी अंश (Arabic Parts) कहता था।
गरिमा बल और अलमुतेन
अरबी ज्योतिषियों ने राशि, उच्च, त्रिकोण, टर्म, फेस, और भाव, गति तथा दृश्यता से ग्रह की ताकत नापी। लग्न, सूर्य, चंद्रमा आदि पर कमाए गए अंकों को जोड़कर अलमुतेन (विजेता) निकाला जाता है, जो पूरी कुंडली को नियंत्रित करता है।
प्रश्न और चुनाव (Horary and Elections)
खलीफाओं और व्यापारियों को तुरंत जवाब चाहिए होते थे। सहल इब्न बिश्र ने सवाल के समय बनाई गई कुंडलियों और कुछ शुरू करने के लिए समय चुनने के नियम तय किए, जैसे कब किसी ग्रह की दृष्टि काम करेगी और कब रुकेगी।
अल-गज़ाली और धर्मशास्त्री
'द इनकोहेरेंस ऑफ द फिलॉसफर्स' में अल-गज़ाली ने इस बात से इनकार किया कि कारण ज़रूरत से प्रभाव पैदा करते हैं: आग कपास नहीं जलाती, ईश्वर जलने का निर्माण करता है। यदि ऐसा है, तो ग्रहों की अपनी कोई शक्ति नहीं है।
खगोलशास्त्रियों का अलग होना
मराघेह वेधशाला (1259) में गणितीय खगोल विज्ञान ('इल्म अल-है'आ) एक ऐसे अनुशासन के रूप में विकसित हुआ जिसे खुद को सही ठहराने के लिए ज्योतिष की ज़रूरत नहीं थी, भले ही अल-तूसी ने मंगोल दरबार में ज्योतिषी का काम किया था।
इब्न खलदुन का फैसला
1377 के मुक़द्दिमा में, इब्न खलदुन ने राजवंशों के उदय और पतन को सामाजिक एकजुटता और अर्थशास्त्र से समझाया, न कि बृहस्पति और शनि के संयोगों से। उन्होंने ज्योतिषियों के दावों को वर्जित और निराधार बताया।
टोलेडो तक का सफर
12वीं सदी में जॉन ऑफ सेविले और हर्मन ऑफ कैरिंथिया ने स्पेन में कई ज्योतिषियों का लैटिन में अनुवाद किया। उनकी किताबें नए विश्वविद्यालयों के ज्योतिष पाठ्यक्रम बन गईं, और आज की पश्चिमी ज्योतिष शब्दावली (जैसे अलमुतेन) वहीं से आई।
परंपरा के प्रमुख लोग
अनुवादक, खगोलशास्त्री, गणितज्ञ और ज्योतिषी जिन्होंने बगदाद से लेकर अंडालूसिया तक सितारों को पढ़ा और ग्रंथों को आकार दिया।
नौबख्त
खलीफा अल-मंसूर के फारसी ज्योतिषी जिन्होंने माशाल्लाह के साथ मिलकर बगदाद की स्थापना का समय चुना; उनके बेटे और पोते पीढ़ियों तक अब्बासिद दरबार में रहे।
माशाल्लाह इब्न अथारी
बसरा के यहूदी ज्योतिषी जिन्होंने बगदाद की स्थापना की कुंडली बनाई और दुनिया के इतिहास, जन्मकुंडलियों और प्रश्नों पर बहुत कुछ लिखा। उन्हें लैटिन में मेसाहला (Messahala) के नाम से जाना जाता था।
सहल इब्न बिश्र
अब्बासिद दरबार के यहूदी ज्योतिषी, जिन्हें लैटिन में ज़ाहेल (Zahel) कहा जाता था, जिनकी किताबों ने प्रश्न ज्योतिष (horary astrology) के नियम तय किए और टोलेडो में अनूदित होने वाले पहले ग्रंथों में से थे।
अल-किंदी
अरबी में लिखने वाले पहले महान दार्शनिक। उनके किरणों के सिद्धांत (theory of rays) ने ज्योतिष को एक भौतिक तंत्र (physical mechanism) दिया, जिससे बाद में यूरोपीय विद्वानों का मध्यकालीन प्रकाशिकी (optics) विकसित हुआ।
अबू माशर अल-बल्खी
लैटिन यूरोप के अल्बुमासर (Albumasar)। हदीस के विद्वान जो बाद में ज्योतिष में आए, उन्होंने 'बृहत् परिचय' और 'संयोगों की पुस्तक' लिखी, और मध्य युग के सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले ज्योतिषी बन गए।
थाबित इब्न कुर्रा
हरान के साबी गणितज्ञ और अनुवादक जिन्होंने ज्यामिति (geometry) और खगोल विज्ञान पर ग्रीक कार्यों का अनुवाद किया; लैटिन लेखक उन्हें ज्योतिषीय छवियों के अधिकारी (authority) के रूप में भी जानते थे।
अल-कबीसी (Alcabitius)
अलेप्पो में सैफ अल-दवला के दरबार के ज्योतिषी। उनकी पुस्तक 'तारों के निर्णयों की कला का परिचय' को सदियों तक यूरोपीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाया गया और उसी के नाम पर एक भाव प्रणाली का नाम पड़ा।
अल-बरूनी
बहुज्ञ विद्वान जिनकी 1029 की 'शिक्षा की पुस्तक' इस कला का एक संपूर्ण शिक्षण पाठ्यक्रम है, जिसमें लॉट्स (अंशों) की लंबी सूची है; उन्होंने ज्योतिषियों के कई दावों पर खुले संदेह के साथ भी लिखा।
इब्न अल-हैथम
भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ, लैटिन प्रकाशिकी (optics) के अलहाज़ेन (Alhazen), जिनके 'टॉलेमी से जुड़े संदेह' (Doubts Concerning Ptolemy) ने ग्रीक मॉडलों की भौतिक खामियों को उजागर किया।
अल-गज़ाली
धर्मशास्त्री जिनकी किताब 'द इनकोहेरेंस ऑफ द फिलॉसफर्स' ने ज़रूरी कारण (necessary causation) पर हमला किया, और इसके साथ ही इस विचार पर भी कि ग्रह अपनी शक्ति से दुनिया पर काम करते हैं।
इब्न रुश्द (Averroes)
अंडालूसियन दार्शनिक और न्यायाधीश जिन्होंने अल-गज़ाली का बिंदुवार उत्तर दिया, और न्याय ज्योतिष (judicial astrology) से दूरी बनाते हुए सभी विज्ञान के आधार के रूप में कारण (causality) का बचाव किया।
नासिर अल-दीन अल-तूसी
खगोलशास्त्री जिन्होंने मंगोल शासक हुलेंगु के लिए मराघेह वेधशाला का निर्देशन किया। उनका 'तूसी-युग्म' (Tusi couple) कोपरनिकस के काम में फिर से दिखाई देता है।
इब्न खलदुन
इतिहासकार और न्यायाधीश जिनके 'मुक़द्दिमा' ने सामाजिक एकजुटता और अर्थशास्त्र के माध्यम से राजवंशों के चक्र को समझाया, और ज्योतिषियों की भविष्यवाणियों को खारिज कर दिया।
जॉन ऑफ सेविले और हर्मन ऑफ कैरिंथिया
अरबी ज्योतिष को लैटिन में अनुवाद करने वाले दो अनुवादक: जॉन ने 1133 में अबू माशर के 'बृहत् परिचय' और अल-कबीसी का अनुवाद किया, हर्मन ने 1140 में अबू माशर और सहल का अनुवाद किया।
डेविड पिंग्री और रिचर्ड लेमे
इतिहासकार जिन्होंने परंपरा के स्रोतों की खोज की: पिंग्री ने इसकी भारतीय और फारसी जड़ों का पता लगाया, और लेमे ने दिखाया कि 'बृहत् परिचय' ने 12वीं सदी के यूरोप में अरस्तु के भौतिक विज्ञान को पहुँचाया।
इस्लामी और अरबी ज्योतिष क्या है
इस्लामी या अरबी ज्योतिष वह ज्योतिष है जिसका अभ्यास 8वीं से 14वीं शताब्दी तक इस्लामी दुनिया भर में अरबी और फारसी में किया जाता था। इसके अभ्यासी (practitioners) मुस्लिम, यहूदी, ईसाई और साबी थे, यही कारण है कि इतिहासकार अक्सर आस्था के लिए "इस्लामी" के बजाय भाषा के लिए "अरबी" पसंद करते हैं। इसके लेखकों ने इसे 'इल्म अहकाम अल-नुजूम' (तारों के निर्णयों का विज्ञान) कहा, और इसे 'इल्म अल-है'आ' (गणितीय खगोल विज्ञान जो इसे संख्याएँ देता था) से अलग रखा। ज्योतिषी, जिसे 'मुनाज्जिम' कहा जाता था, एक सलाहकार के साथ-साथ एक दरबारी अधिकारी भी था। वह जन्मकुंडलियाँ बनाता था, लेकिन वह राजवंशों के भाग्य की भविष्यवाणी भी करता था, किसी अभियान या राज्याभिषेक के लिए मुहूर्त (hour) चुनता था, और वज़ीरों और व्यापारियों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देता था। इस परंपरा ने केवल ग्रीक ज्योतिष को सुरक्षित नहीं रखा। इसने ग्रीक ज्यामिति, इतिहास के फारसी चक्रों और भारतीय गणित को एक ही प्रणाली में मिलाया, अरस्तु के भौतिक विज्ञान (Aristotle's physics) के शब्दों में इसके लिए तर्क दिया, और परिणाम को यूरोप भेज दिया।
बगदाद: तारों द्वारा स्थापित एक शहर
अब्बासिद (Abbasid) राजवंश ने 750 में सत्ता संभाली और अपनी राजशाही का ज़्यादातर विचार सासानी (Sasanian) फारस से उधार लिया, जिसमें सितारों में शाही सत्ता को पढ़ने और विद्वानों को पैसे देने की फारसी आदत भी शामिल थी। इसका सबसे प्रसिद्ध ज्योतिषीय कार्य बगदाद की स्थापना था। खलीफा अल-मंसूर ने अपने ज्योतिषियों एक फारसी नवाबख्त और बसरा के एक यहूदी माशाल्लाह से अपने 'राउंड सिटी' की पहली ईंटें रखने का समय चुनने को कहा, और उन्होंने 31 जुलाई 762 की दोपहर चुनी। आधुनिक इतिहासकारों ने जिस तरह से कुंडली का पुनर्निर्माण किया है, उसमें धनु (Sagittarius) लग्न है और इसके शासक, सबसे महान लाभकारी ग्रह (greater benefic) बृहस्पति (Jupiter), पहले भाव में है, जो लंबे और समृद्ध शासन का वादा है। युद्ध का ग्रह मंगल (Mars) छठे भाव में स्थित है। छठा एक कमज़ोर, पतित (cadent) भाव है, जो मंगल के नुकसान को सीमित करता है, और हेलेनिस्टिक प्रणाली में यह मंगल के आनंद (joy) का भाव भी है, इसलिए शहर खुद पर हमला किए बिना अपनी सैन्य शक्ति को बनाए रखेगा। इतिहासकार अभी भी विवरणों पर बहस करते हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या ज्योतिषियों ने उष्णकटिबंधीय (tropical) राशिचक्र के बजाय एक नाक्षत्र (sidereal) फारसी राशिचक्र के साथ काम किया था।
अनुवाद आंदोलन
अगली दो सदियों में बगदाद एक विशाल अनुवाद प्रयास का केंद्र बन गया। खलीफाओं, विशेष रूप से अल-मामून (जिनका शासन 813 से 833 तक था), और दरबार के धनी परिवारों ने ग्रीक, सीरियाई, फारसी और संस्कृत कार्यों को अरबी में अनुवाद करने के लिए पैसे दिए। 'बैत अल-हिकमा' (House of Wisdom) के नाम से जानी जाने वाली पुस्तकालय और अकादमी परंपरा पूरे उद्यम के लिए खड़ी है। टॉलेमी की 'टेट्राबिब्लोस' (Tetrabiblos) 'किताब अल-अरबा' (चार की पुस्तक) बन गई; सिडोन के डोरोथियस की ज्योतिषीय कविता एक फारसी संस्करण के माध्यम से आई; वेटियस वैलेंस ज्ञात थे; और फारसी और भारतीय खगोलीय तालिकाओं ('ज़ीज') ने ज्योतिषियों को वे ग्रह स्थितियाँ दीं जिनकी उन्हें ज़रूरत थी। हुर्रान के साबी लोगों (Sabians), एक समुदाय जिसने पुरानी तारा पूजा और हर्मेटिक विद्या को जीवित रखा था, ने एक बड़ी भूमिका निभाई। उनके सबसे प्रसिद्ध विद्वान, थाबित इब्न कुरा, ग्रीक, सीरियाई और अरबी पढ़ते थे और उन्होंने गणितीय कार्यों का अनुवाद और सुधार किया जिन पर ज्योतिष निर्भर था।
अल-किंदी: भौतिकी के रूप में ज्योतिष
हेलेनिस्टिक ज्योतिष स्टोइक (Stoic) भाग्य, तारा धर्म और हर्मेटिक रहस्यवाद (Hermetic mysticism) में लिपटा हुआ आया था, जो तौहीद (ईश्वर की पूर्ण एकता) और स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाले निर्माता के साथ मेल खाना मुश्किल था। जो ज्योतिषी इस्लामी बौद्धिक जीवन में जगह चाहते थे, उन्हें एक प्राकृतिक तंत्र (natural mechanism) की ज़रूरत थी, न कि देवताओं (pantheon) की। दार्शनिक अल-किंदी, जिनकी लगभग 873 में मृत्यु हो गई, ने वह प्रदान किया। 'ऑन द रेज़ ऑफ द स्टार्स' में, जो लैटिन में 'डी रेडिइस' के रूप में जीवित है, उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया में हर चीज़ हर दिशा में किरणें भेजती है, और तारे, विशाल, शाश्वत और शुद्ध आकाशीय पदार्थ से बने होने के कारण, सबसे मजबूत और सबसे व्यवस्थित किरणें भेजते हैं। ये किरणें चंद्रमा के नीचे दुनिया में आती हैं और यहाँ कारणों के रूप में कार्य करती हैं, जो चार तत्त्वों को गर्म और ठंडा करती हैं, चलाती हैं और मिलाती हैं। इस तरह देखा जाए तो ज्योतिष शकुन (omens) की व्याख्या न रहकर दूर से काम करने वाली एक भौतिक शक्ति का अध्ययन बन गया। विकिरण (radiation) के इसी विचार ने मध्यकालीन प्रकाशिकी (optics) और बाद में यूरोपीय लेखकों के प्राकृतिक जादू को आकार दिया।
अबू माशर और 'बृहत् परिचय'
बल्ख के अबू माशर, जो 787 से 886 तक जीवित रहे, इस परंपरा के केंद्रीय व्यक्ति हैं। उनके शिष्य शाधान द्वारा बताई गई कहानियों में कहा गया है कि उन्होंने हदीस के विद्वान के रूप में शुरुआत की और अल-किंदी के साथ झगड़े के बाद ही मध्यम आयु में खगोल विज्ञान और ज्योतिष की ओर रुख किया; वे अपनी सदी के सबसे प्रसिद्ध और विपुल ज्योतिषी बने, और बाद में अल-बरूनी सहित कुछ समकालीनों ने उन पर अल-किंदी से उनके स्वीकार करने से कहीं अधिक लेने का आरोप लगाया। उनकी 'तारों के निर्णयों के विज्ञान का बृहत् परिचय' (Great Introduction to the Science of the Judgments of the Stars) कला के एक लंबे बचाव के साथ खुलती है, जो अरस्तु के 'फिजिक्स' और 'ऑन जनरेशन एंड करप्शन' से ली गई है। उनका तर्क है कि स्वर्ग की शाश्वत गोलाकार गति चार तत्त्वों पर कार्य करती है, जिससे वे मिलते हैं, गर्म होते हैं, ठंडे होते हैं और अलग होते हैं। इसलिए ग्रहों की स्थिति, उनकी दृष्टि (aspects) और उनकी दूरियाँ नीचे मौसम, जीवित शरीरों और मानव मामलों को आकार देती हैं। ईश्वर पहला कारण बना हुआ है जो सबसे बाहरी गोले (outermost sphere) को घुमाता है; ग्रह द्वितीयक कारण हैं, वे गियर हैं जिनके माध्यम से उसका आदेश पृथ्वी तक पहुँचता है। इस तर्क ने उस समय की मुख्य धार्मिक आपत्ति का जवाब दिया। इसका प्रभाव ज्योतिष से कहीं आगे था: इतिहासकार रिचर्ड लेमे ने दिखाया कि 1133 में जॉन ऑफ सेविले और 1140 में हर्मन ऑफ कैरिंथिया द्वारा किए गए इस पुस्तक के लैटिन अनुवाद, वे पहले ग्रंथ थे जो अरस्तु के स्वयं के कार्यों के लैटिन में आने से पहले पश्चिमी यूरोप में अरस्तु के प्राकृतिक दर्शन को वापस लाए।
संयोगों में लिखा इतिहास
हेलेनिस्टिक ज्योतिष मुख्य रूप से व्यक्तिगत जन्मकुंडलियों के बारे में था। अरबी परंपरा ने दुनिया के युगों के बारे में सासानी फारसी विचारों का लाभ उठाते हुए, सांसारिक ज्योतिष (mundane astrology) यानी राष्ट्रों, राजवंशों, धर्मों और मौसम के ज्योतिष को एक बड़ा और व्यवस्थित क्षेत्र बना दिया। अबू माशर की 'हज़ारों की पुस्तक' (Book of Thousands) ने दुनिया के समय के विशाल भारतीय और फारसी चक्रों को धर्मग्रंथों के इतिहास के अनुकूल बनाया, 3102 ईसा पूर्व में मेष (Aries) की शुरुआत में सभी ग्रहों के मिलन को रखा और जलप्रलय की तारीख तय की। उनकी 'संयोगों की पुस्तक' (Book of Conjunctions) ने आँखों को दिखाई देने वाले दो सबसे धीमे ग्रहों, बृहस्पति और शनि पर कार्यप्रणाली का निर्माण किया। वे हर बीस साल में मिलते हैं, और हर बैठक पिछली बैठक से लगभग 243 डिग्री आगे होती है, जो लगभग 240 सालों तक एक ही तत्त्व की तीन राशियों में संयोगों की एक शृंखला को बनाए रखती है, जिसके बाद यह अगले तत्त्व में चली जाती है। लगभग 960 सालों के बाद यह शृंखला सभी चार तत्त्वों से होकर गुज़रती है और वहीं लौट आती है जहाँ से शुरू हुई थी। ज्योतिषियों ने तीनों पैमानों को घटनाओं के तीन आकारों के रूप में पढ़ा:
- विद्रोही, स्थानीय शासकों और अल्पकालिक गड़बड़ी के लिए, हर 20 साल या उसके आसपास एकल संयोग (single conjunction);
- नए धार्मिक आंदोलनों, राज्यों के उदय और पतन और राजवंशों में बदलाव के लिए, हर 240 साल या उसके आसपास तत्त्वों का बदलाव;
- दुनिया की सत्ता के हस्तांतरण और पैगंबरों के आगमन के लिए, हर 960 साल या उसके आसपास पहले तत्त्व में लौटना।
इस योजना का उपयोग आगे और पीछे दोनों तरफ किया गया था। ज्योतिषियों ने बताया कि पैगंबर मुहम्मद का जन्म 571 में हुआ था, जब संयोग वृश्चिक (Scorpio) में एक मिलन के साथ जल राशियों में बदल गए थे, और उन्होंने उसी चक्र के अनुसार प्रारंभिक इस्लाम की बाद की घटनाओं को पढ़ा। भविष्य की ओर देखते हुए, उन्होंने अब्बासिद शासन के अंत के संकेतों के लिए आने वाले बदलावों की खोज की, और बाद के लेखकों ने 1258 में बगदाद पर मंगोल हमले (जब हुलेगु खान ने अंतिम अब्बासिद खलीफा को मार डाला) को ऐसी चेतावनियों के पूरा होने के रूप में पढ़ा। 1186 में तुला (Libra) में सभी ग्रहों का प्रसिद्ध संयोग, जिसने यूरोप और मध्य पूर्व भर में अंत-समय की भविष्यवाणियों की दहशत फैला दी, यह दर्शाता है कि सिद्धांत को कितनी गंभीरता से लिया गया था।
भाव, उपकरण और सटीक समय
हेलेनिस्टिक ज्योतिषियों ने मुख्य रूप से पूरी राशि वाले भावों (whole-sign houses) का उपयोग किया था, जिसमें राशि चक्र की प्रत्येक राशि चढ़ती हुई राशि (लग्न) से गिना गया एक भाव है। इस्लामी दुनिया के खगोलविदों ने, जो गोलाकार त्रिकोणमिति (spherical trigonometry) में प्रशिक्षित थे और नमाज़ के समय तथा मक्का की दिशा को ठीक से तय करने के लिए आवश्यक थे, चतुर्थांश प्रणालियों (quadrant systems) का पक्ष लिया जो पर्यवेक्षक के अपने क्षितिज और मध्य आकाश से आकाश को विभाजित करते हैं। सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली अल-कबीसी (लैटिन में अल्काबिटियस) द्वारा सिखाई गई प्रणाली थी, जिनकी 'तारों के निर्णयों की कला का परिचय' (Introduction to the Art of the Judgments of the Stars), अलेप्पो में सैफ अल-दवला के दरबार के लिए लिखी गई और जॉन ऑफ सेविले द्वारा अनूदित की गई, जो मध्ययुगीन यूरोपीय विश्वविद्यालयों की मानक ज्योतिष पाठ्यपुस्तक बन गई। उनकी विधि समय पर आधारित है। यह लग्न अंश के दैनिक अर्ध-चाप (diurnal semi-arc) को लेती है, यानी वह समय जो उस अंश को पूर्वी क्षितिज से मध्य आकाश तक यात्रा करने में लगता है, उसे तीन बराबर भागों में विभाजित करती है, और ग्यारहवें, बारहवें, दूसरे और तीसरे भावों के सिरे (cusps) खोजने के लिए विभाजनों को अयनवृत्त (ecliptic) पर वापस ले जाती है। इसे हाथ से करने के लिए त्रिकोणमितीय तालिकाओं की आवश्यकता होती थी। एस्ट्रोलैब ने इसे तेज़ कर दिया: यह पीतल का उपकरण स्टीरियोग्राफिक प्रक्षेपण द्वारा आकाश के गोले को एक सपाट प्लेट पर मैप करता है, और बगदाद और बाद में अल-अंदलुस के निर्माताओं ने दिए गए अक्षांश के लिए प्लेटों पर भाव रेखाएँ उकेरीं, जिससे तारे के नक्शे को सही समय पर घुमाने से एक नज़र में सिरे दिखाई देते थे।
लॉट्स, या अरबी अंश
लॉट (Lot) एक चार्ट (कुंडली) में एक बिंदु है जो दो बिंदुओं के बीच की दूरी लेकर उसे फिर से लग्न से नापकर पाया जाता है। यूनानियों ने एक छोटे से समूह का उपयोग किया था, जिनमें पॉलस एलेक्जेंड्रिनस द्वारा सूचीबद्ध सात हर्मेटिक लॉट्स सबसे प्रसिद्ध हैं। अरबी ज्योतिषियों ने उनका विस्तार मानव जीवन के लगभग हर विषय तक कर दिया, और 1029 में लिखी गई अल-बरूनी की 'ज्योतिष कला के तत्त्वों में शिक्षा की पुस्तक' में उनकी विस्तार से सूची है। यूरोप उन्हें अरबी अंशों (Arabic Parts) के रूप में जानता था। सबसे प्रसिद्ध ये हैं:
- सौभाग्य का अंश (Lot of Fortune), दिन की कुंडली में लग्न + चंद्रमा - सूर्य, यह शरीर, स्वास्थ्य और भौतिक परिस्थिति का चंद्र लॉट है;
- आत्मा का अंश (Lot of Spirit), दिन की कुंडली में लग्न + सूर्य - चंद्रमा, यह इच्छा, कार्य और व्यवसाय का सौर लॉट है;
- धन का अंश (Lot of Wealth), संपत्ति और अधिकार के लिए, लग्न + दूसरे भाव का सिरा (cusp) - दूसरे भाव का शासक;
- मृत्यु का अंश (Lot of Death), आठवें भाव के विषयों, अंत, नुकसान और विरासत के लिए, जिसे एक तारीख के बजाय प्रतीकात्मक रूप से पढ़ा जाता है, लग्न + आठवें भाव का सिरा - चंद्रमा।
रात की कुंडली में पहले दो सूत्रों में सूर्य और चंद्रमा आपस में जगह बदल लेते हैं। एक सवाल को एक ऐसे बिंदु में बदलकर जिसे खोजा और देखा जा सकता है, लॉट्स ने मुनाज्जिम (ज्योतिषी) को विवाह से लेकर बीमारी के नतीजे तक लगभग किसी भी मामले की अलग से जाँच करने का एक तरीका दिया।
गरिमा और अलमुतेन
खेल में इतने सारे ग्रहों, भावों और लॉट्स के होने से, ज्योतिषियों को यह तय करने के लिए एक तरीके की ज़रूरत थी कि किन कारकों का वज़न सबसे अधिक है। उन्होंने आवश्यक गरिमाओं (essential dignities) को औपचारिक रूप दिया, यानी वह ताकत जो एक ग्रह अपनी राशि से स्वगृह (domicile), उच्च (exaltation), त्रिकोण (triplicity), टर्म (term) और फेस (face) के माध्यम से खींचता है, और आकस्मिक गरिमाओं (accidental dignities) जैसे भाव स्थिति, गति और दृश्यता को जोड़ा। इनसे अलमुतेन (almuten) आया, अरबी शब्द 'अल-मुब्तज़' से, जिसका अर्थ है विजेता। ज्योतिषी कुंडली के प्रमुख बिंदुओं पर प्रत्येक ग्रह की गरिमा को स्कोर करता है, आमतौर पर लग्न, सूर्य, चंद्रमा, सौभाग्य का अंश और जन्म से पहले की नई या पूर्णिमा (new or full Moon before birth), और उच्चतम कुल अंक वाला ग्रह संपूर्ण जन्मकुंडली का अलमुतेन होता है, जिसे इसका शासी प्रभाव (governing influence) और जीवन की लंबाई के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक माना जाता है। माशाल्लाह और अबू माशर ने ऐसी विधियों का उपयोग किया, और गुइडो बोनाटी तेरहवीं शताब्दी में उन्हें लैटिन ज्योतिष में ले गए।
प्रश्न और मुहूर्त ज्योतिष
दरबारों को भी त्वरित उत्तर की आवश्यकता होती थी। खलीफाओं, वज़ीरों और व्यापारियों ने व्यापार, युद्ध, बीमारी और विवाह के बारे में पूछा, और ज्योतिषियों ने प्रश्न ज्योतिष (horary astrology) (सवाल पूछे जाने के समय के लिए बनाई गई कुंडली) और मुहूर्त ज्योतिष (electional astrology) (कुछ शुरू करने के लिए अच्छे समय का चुनाव) के साथ जवाब दिया। नवीं सदी के एक यहूदी ज्योतिषी सहल इब्न बिश्र, जिन्हें लैटिन में ज़ाहेल (Zahel) के नाम से जाना जाता था, ने दोनों के काम करने के नियम दिए। उनकी किताबों में यह बताया गया है कि कब दो ग्रहों के बीच लागू होने वाली दृष्टि (applying aspect) का अर्थ है कि मामला पूरा हो जाएगा, और कब कोई अन्य ग्रह इसे काट देगा, अवरुद्ध कर देगा या निराश कर देगा। उनके नियमों को किसी भी जन्म डेटा की आवश्यकता नहीं थी, जिसने उन्हें किसी भी प्रश्न वाले व्यक्ति के लिए उपयोगी बना दिया। सहल बारहवीं शताब्दी के स्पेन में अनूदित होने वाले पहले लेखकों में से थे, और उनके नियम बाद के यूरोपीय प्रश्न अभ्यास (horary practice) में चलते हैं।
आलोचक: धर्मशास्त्र, खगोल विज्ञान और इतिहास
ग्यारहवीं सदी से यह महान संश्लेषण (synthesis) कई तरफ से हमलों के घेरे में आ गया। धर्मशास्त्री अल-गज़ाली ने 'द इनकोहेरेंस ऑफ द फिलॉसफर्स' (The Incoherence of the Philosophers) में यह कहकर अबू माशर के बचाव की जड़ पर वार किया कि कोई भी कारण ज़रूरत (necessity) से अपना प्रभाव पैदा नहीं करता। आग अपने स्वभाव से कपास को नहीं जलाती; जब दोनों छूते हैं तो ईश्वर ही जलने का निर्माण करता है, और वह आमतौर पर इस नियमित पैटर्न (ईश्वर की आदत) को बनाए रखता है, ताकि लोग एक व्यवस्थित दुनिया में रह सकें, और साथ ही इसे तोड़ने के लिए स्वतंत्र भी रहें। यदि रची गई चीज़ों की अपनी कोई शक्ति नहीं है, तो ग्रह किसी भी चीज़ का कारण नहीं बन सकते, और निर्णय ज्योतिष (judicial astrology) ईश्वर के फैसलों को पढ़ने की एक कोशिश बन जाती है। इब्न रुश्द (Ibn Rushd) ने कॉर्डोबा में 'द इनकोहेरेंस ऑफ द इनकोहेरेंस' में उनका बिंदुवार उत्तर दिया, यह तर्क देते हुए कि स्थिर कारणों के बिना कोई विज्ञान हो ही नहीं सकता, लेकिन फिर भी उन्हें ज्योतिषियों की विशिष्ट भविष्यवाणियों पर बहुत कम भरोसा था। खगोलशास्त्रियों ने अलग संदेह उठाए। इब्न अल-हैथम की 'टॉलेमी से जुड़े संदेह' (Doubts Concerning Ptolemy) ने ग्रीक मॉडलों में भौतिक विरोधाभासों (physical contradictions) को उजागर किया, और 1259 में नासिर अल-दीन अल-तूसी के तहत स्थापित मराघेह वेधशाला में, आकाश के गणितीय अध्ययन ने अपने आप में एक स्वतंत्र अनुशासन के रूप में विकास किया। इसने 'तूसी-युग्म' (Tusi couple) जैसे मॉडल तैयार किए जो कोपरनिकस में फिर से दिखाई देते हैं, जबकि खगोलशास्त्रियों के बीच ज्योतिष की बहुत सी साख कम हो गई, हालाँकि अल-तूसी ने खुद मंगोल शासक के लिए ज्योतिषी के रूप में काम किया था। अंत में इतिहासकार इब्न खलदुन ने 1377 के अपने मुक़द्दिमा (Muqaddimah) में इतिहास के औज़ार के रूप में संयोगों के सिद्धांत को खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य 'असबिय्या' (वह एकजुटता जो एक समूह को एक साथ रखती है) और आर्थिक ताकतों से उठते और गिरते हैं, न कि बृहस्पति और शनि के एक तत्त्व से दूसरे तत्त्व में जाने से। उन्होंने अनदेखे भविष्य को देखने के ज्योतिषियों के दावों को निराधार और वर्जित माना।
यूरोप में विरासत
आलोचकों ने इस्लामी जगत के भीतर ज्योतिष को कमज़ोर कर दिया, लेकिन तब तक यह परंपरा भूमध्य सागर पार कर चुकी थी। टोलेडो, सिसिली और दक्षिणी फ्रांस में, 12वीं सदी के अनुवादकों जैसे जॉन ऑफ सेविले और हर्मन ऑफ कैरिंथिया ने अबू माशर, अल-कबीसी, सहल और माशाल्लाह को लैटिन में बदल दिया। ये किताबें नए विश्वविद्यालयों का ज्योतिष पाठ्यक्रम बन गईं, जहाँ यह विषय चिकित्सा और गणित के साथ पढ़ाया जाता था, और यूरोपीय ज्योतिष ने इन किताबों के साथ अरबी से अपनी तकनीकी शब्दावली (technical vocabulary) उधार ली। महान संयोग सिद्धांत (Great conjunction theory), चतुर्थांश भाव (quadrant houses), अरबी अंश (Arabic Parts), अलमुतेन और प्रश्न ज्योतिष के नियम (rules of horary) सभी इसी रास्ते से पश्चिम पहुँचे, और वे आज भी पारंपरिक पश्चिमी ज्योतिष की रीढ़ बने हुए हैं।
इस खंड को कैसे पढ़ें
ऊपर दिए गए अध्याय कार्ड बगदाद की स्थापना से लेकर इब्न खलदुन की आलोचना तक की परंपरा का अनुसरण करते हैं, और नीचे दिए गए चित्र उन लोगों के नाम हैं जिन्होंने इसे आकार दिया। इस कला का निर्माण कैसे हुआ, यह जानने के लिए शुरुआती अध्याय पढ़ें, इसकी तकनीकों के लिए बीच वाले अध्याय, और इसके खिलाफ तर्कों तथा यूरोप में इसके प्रवेश के लिए आखिरी अध्याय पढ़ें। यहाँ ज्योतिष को इतिहास और आत्म-चिंतन (reflection) के लिए एक प्रतीकात्मक भाषा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि तय नतीजों के वादे के रूप में। यह परंपरा और इसकी तकनीकें Tarot Academy पारिस्थितिकी तंत्र की बावन भाषाओं में उपलब्ध हैं।
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